Mother's day spcl

भूल तुम्हे मैं जाता  हूँ
जब दोस्तो कि मण्डली बुलाती है
तुम्हारी ममता का धयान तबहीं आता है
जब भूख मुझे सताती है
जब पेट मेरा भर जाये
जब नींद मेरी लोरी गाती है
तब माँ तुम खाती हो तुम सोती हो
क्यों माँ तुम ऐसी होती हो !!!

मैं चिड़चिड़ाया भी लड़ा तुमसे
समझ लेता हूँ कभी कभी खुद को बड़ा तुमसे
थप्पड़ से समझाती तुम
भटकी राह को सही दिशा दिखातीं तुम
झूठे बड़प्पन का अपने अफसोस मुझे नही होता है
पर तुम हाथ उठाकर दुखी होती हो
क्यों माँ तुम ऐसी होती हो !!!

बड़े बड़े सपने देखता हूँ
भावनाओ को कभी तुम्हारी उसमे रोंद्ता हू
तुम्हारी भी एक शख्सियत है खुद की
ये कभी नही सोचता हू
आज चलता हू जब सर उठा के
तो एहसास नही ये होता है
मेरी सुख समृद्धि के खातिर
तुम अपने सपने खोती हो
क्यों माँ तुम ऐसी होती हो !!!! 
  

Solace....

ये शब्दों का दायरा मेरा
सिमटना चाहता है उन क्षणों में
न कवि का अंश न मनुष्य का दम्भ
जहा मैं हूँ और बस मैं हूँ। ।

ये यादों का मिटटी का गुल्लक मेरा
बिखरना चाहता है उन कणो में
न द्वेश भाव न किसी की प्रीत का राग
जिसमे मैं हूँ और बस मैं हूँ। …

ज़माने से बंधा अश्को का सागर मेरा
अब बहना चाहता है उन लहरों में
न शर्मिंदगी का दलदल न गर्व का पर्वत
डूबा लहरों में मैं हूँ बस मैं हूँ। । 

One sided love....

धुएँ की छुअन सा एहसास है
महसूस न होने का रिवाज़ है
एक तरफ़ा इश्क़ है ही वो जज़बा
दुआ में किसी काफिर का  अलफ़ाज़ है।

शिकवो शिकायतों का दौर जरा पुराना है
जुनून इसका रहम कि उम्मीद का मिज़ाज़ है
एक तरफ़ा इश्क़ से कर ली तौबा जिसने
वही जहां में क़ाज़ी है वही सरफ़राज़ है !

इतनी निकम्मी हुई है कायनात
नवाज़ा गफलतों का शहज़ादा का खिताब है
एक तरफ़ा इश्क़ क्या कर लिया मैंने
दोजक वालो को भी मुझसे अब ऐतराज़ है !!

ehsaas na ho....

न तो सहर कही भटकी है
न बक्शी खुद ने मेहेरबानी है
क्या जिक्र किसी से करे
जब खुद को ही हैरानी है
एहसास किया तो इश्क़ है
वरना रोज़ कि जिंदगानी है !!!

वैसे तो टउल्लुक़ात है कुछ पहरो का
पर लगता अब क्यों रूहानी है
दीवाने आम की शिरकत
उसकी अब ख़ास में मनमानी है
एहसास किया तो इश्क़ है
वरना  रोज की जिंदगानी है !!!!

अब उलझन बड़ी पेचीदा है
ये तब्बस्सुम बिना खिले मुरझानी है
अब एहसास ही करना छोड़ दिया
कही कोने में दफन ये कहानी है
एहसास किया था तो इश्क़ था
अब रोज कि जिंदगानी है !!!!

shuruat


Chit ki santushti lahuluhan rahe
Vichaaro ka aisa shool chubhe
unnati ki path ka pathik utsaahit
Shanik safalta se naa ho bhramit
Nahi h shehzaade jo badshah ki bisaat
Yahi hamara falsafa yahi shuruat


Gurur nahi ye fitur hamara
Ek lamha bhi na jaaye fizul hamara
Mashgool rahe dopahar poori
Utni hi mashoor rahegi raat
Yahi hamara falsafa yahi shuruat!!!!!

Regret......

 हम बेवजह रात के इंतज़ार में फ़ना हो गए
वरना शाम भी बहुत हसीन  थी गुज़ारने को
मुद्दतो से नाकामी को दुआ देते रहे
और दोजको से उठती दुआ लेते रहे
शरबत की ख्वाइश में रेगिस्तान हो गये
वरना अश्क ही काफी था तुम्हारा मेरी प्यास भुजाने को ....

हम  बेवजह गूंजते कमरों का आशियाँ  बना बैठे
वर्ना  बाहें ही तुम्हारी काफी थी सुकून पाने को
ख्वाइश थी तुम्हारी मुझसे एक गुल पाने की
करती थी दर्ख्वास्त कायनात से हमको मिलाने की
इश्क को मन बहलाने का जरिया समझ बैठे
जहन्नुम में भी नहीं जगह है ऐसे काफिर सयाने को
हम बेवजह रात के इंतज़ार में फ़ना हो गए
वरना शाम भी बहुत हसीन  थी गुज़ारने को .........




Mehkhaane me...

न शराफत है न बेमुरौवत है
न हजरत है हम ज़माने में 
न बेवफा है न किसी से खफा है
न मेहमान है हम हर शामियाने में 
रंगीन फिर भी मन की हर शाम है
दिल ढूंढता है सुकून भीतर महखाने में  !!!!

बदनाम इंसान है बदनाम मोहल्ला है
इतने कसूर है इस पैमाने में 
हुस्न के सच्चे कद्रदान है फिर भी  
हुस्न को मिलते सभी खोट दीवाने में
आशिक मिजाज  अंदाज़ नहीं बदलता मन का
दिल निभाता है मोहब्बत भीतर महखाने में !!!!

न समझे किस्मत न बदले किस्मत 
बस मशगूल घूम रहे अनजाने में
शोहरत की चाह  दबी मन में
वरना कौन पूछेगा कब्र के वीराने में
सिकंदर फिर भी जिन्दा है जहन में 
दिल पहनता है ताज भीतर महखाने में !!!!!!