सावन की रिमझिम की चाह है
कम लगता दरिया का पानी है
दीदार तो हाथ की रेत है
जितना पकडो उतनी फिसल जानी है
मुझे इज़हार में हिचकिचाहट है
ये समझदारी है या नादानी है
मेरे लिए तो इश्क है
बाकी दुनिया के लिए कहानी है!!!
हर पल उनके बारे में सोचो
फ़िर भी ख्यालो में खीचातानी है
गुफ्तगू कितनी भी कर लो
उनकी हर एक बात याद मुह जबानी है
शिकार में घुमने की इच्छा नही
यहाँ नज़रें मिलना ही सबसे रूमानी है
मेरे लिए तो ये इश्क है
बाकी दुनिया के लिए कहानी है!!!!
सब्र की नसीहते मिलती है
यहाँ तो धीर धरना लगता बेमानी है
वो भी तो दिल से थोड़ा सोचे
कब करेंगी, एक ही तो जिंदगानी है
अकेले में गुमसुम रहता हूँ
सबको दीवानगी से परेशानी है
मेरे लिए तो ये इश्क है
बाकी दुनिया के लिए कहानी है!!!!
जनाजे में तो......
रंज की गुफ्तगू से क्यो रिश्ते में दाग
मोहब्बत की आरजू में ही परवाने जलते है
मुस्कुराकर मिलो सबसे, चार पल की ज़िन्दगी है
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!
दूसरे के ज़ख्म पर तू लतीफे लिखता है
वो भी तेरे ज़ख्म नमक से भरते है
ज़ख्मो को पिरो दे, बना सबको मुस्तफा
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!!
बदन की चाह रख, ख़ुद को आशिक कहता है
ऐसे तो यहाँ सिर्फ़ बाजारों में फिरते है
इश्क इबादत है,पाक है, उसे रूह से कर
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!!
मोहब्बत की आरजू में ही परवाने जलते है
मुस्कुराकर मिलो सबसे, चार पल की ज़िन्दगी है
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!
दूसरे के ज़ख्म पर तू लतीफे लिखता है
वो भी तेरे ज़ख्म नमक से भरते है
ज़ख्मो को पिरो दे, बना सबको मुस्तफा
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!!
बदन की चाह रख, ख़ुद को आशिक कहता है
ऐसे तो यहाँ सिर्फ़ बाजारों में फिरते है
इश्क इबादत है,पाक है, उसे रूह से कर
वरना ज़नाजे में तो सभी साथ चलते है!!!!!
भारत में क्रांति...
गुलामी की चादर फ़िर ओढ़ लो
आज़ादी तुमको ज़चीही नही
अमेरिकन चश्मे से तरक्की मत नापो
देसी आखो से देखो हालत है बिगड़ी हुई
जो ज्यादा मिठास घुली है आज़ादी में
बना लो नमक,दांडी की पगडण्डी अभी भी वही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!
पहले जो नेता कहलाते थे
वो आन्दोलन करते थे राजनीति नही
सत्ता के प्यासे गिद्ध जो उड़ रहे है
वो सब चूस लेंगे,बचेगी नही निशानी कोई
जो ये शब्द नही लगते अच्छे तुमको
पूछो आधी आबादी से,जो गर्त में है डूबी कही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!
संस्कृति के मेले लग रहे वीराने में
संस्कारो की भाषा पड़ी तहखाने में कही
नारी का उत्थान हो रहा यहाँ
लोगो की आखो में लज्जा बची ही नही
धर्म का चोगा सब पहने डोळ रहे है
अब यहाँ भक्त ही भक्त है भगवान् नही
भ्रष्टाचार का किस्सा जो मैं लिखने बैठू
तो कम पड़ जायेंगे हिन्दी के शब्दकोष सभी
चेत जाओ मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!!!
आज़ादी तुमको ज़चीही नही
अमेरिकन चश्मे से तरक्की मत नापो
देसी आखो से देखो हालत है बिगड़ी हुई
जो ज्यादा मिठास घुली है आज़ादी में
बना लो नमक,दांडी की पगडण्डी अभी भी वही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!
पहले जो नेता कहलाते थे
वो आन्दोलन करते थे राजनीति नही
सत्ता के प्यासे गिद्ध जो उड़ रहे है
वो सब चूस लेंगे,बचेगी नही निशानी कोई
जो ये शब्द नही लगते अच्छे तुमको
पूछो आधी आबादी से,जो गर्त में है डूबी कही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!
संस्कृति के मेले लग रहे वीराने में
संस्कारो की भाषा पड़ी तहखाने में कही
नारी का उत्थान हो रहा यहाँ
लोगो की आखो में लज्जा बची ही नही
धर्म का चोगा सब पहने डोळ रहे है
अब यहाँ भक्त ही भक्त है भगवान् नही
भ्रष्टाचार का किस्सा जो मैं लिखने बैठू
तो कम पड़ जायेंगे हिन्दी के शब्दकोष सभी
चेत जाओ मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!!!
इश्क करके देखो...
तुम कहती हो उम्र का दस्तूर है
ये तो हर रूह में बसती है
तुम कहती हो,इश्क की इजाज़त नही
उल्फत कहा किसी का फरमान सुनती है
तुम आईने में देखती हो रूप
सुन्दरता फ़िर भी फीकी दिखती है
इश्क करके तो देखो एकबार
दुनिया कितनी हसीन लगती है!!!
नज़रें मिले तो कहती हो धोखा है
यहाँ तो नींद में भी पलके नही झुकती है
तुम्हे तो इश्क ही फिजूल लगता है
कितनो की साँसे इसी से चलती है
तुम्हे इनकार का हक मिला है
रब से हुई यही एक गलती है
इश्क करके तो देखो एकबार
दुनिया कितनी हसीन लगती है!!!!!!
ये तो हर रूह में बसती है
तुम कहती हो,इश्क की इजाज़त नही
उल्फत कहा किसी का फरमान सुनती है
तुम आईने में देखती हो रूप
सुन्दरता फ़िर भी फीकी दिखती है
इश्क करके तो देखो एकबार
दुनिया कितनी हसीन लगती है!!!
नज़रें मिले तो कहती हो धोखा है
यहाँ तो नींद में भी पलके नही झुकती है
तुम्हे तो इश्क ही फिजूल लगता है
कितनो की साँसे इसी से चलती है
तुम्हे इनकार का हक मिला है
रब से हुई यही एक गलती है
इश्क करके तो देखो एकबार
दुनिया कितनी हसीन लगती है!!!!!!
तेरी भी हस्ती है...
मिट्टी का कण दिखता है
जब लगता जमाने का हिसाब है
बूँद भर मोहब्बत लेकर डोलता है
यहाँ समंदर भी तालाब है
खुदा के नाम को क्यो रोता है
अपना वजूद बना इस आशियाने में
खुदा ख़ुद पैगाम लेकर आएगा
शायर, तेरी भी हस्ती है जमाने में!!!
हुस्न की चौखट पर क्यो ताकता है
वह तो मिराज़ की रेत तपती है
तू हसिनाओ के आगे नतमस्तक है
वो तुझपर पीछे से फब्तिया कसती है
इश्क का अगर इतना ही छाया सुरूर है
तो दिखा जलवा कुछ ऐसा तराने में
हसिनाये ख़ुद आकर कहेंगी
शायर, तेरी भी हस्ती है जमाने में!!!!!
जब लगता जमाने का हिसाब है
बूँद भर मोहब्बत लेकर डोलता है
यहाँ समंदर भी तालाब है
खुदा के नाम को क्यो रोता है
अपना वजूद बना इस आशियाने में
खुदा ख़ुद पैगाम लेकर आएगा
शायर, तेरी भी हस्ती है जमाने में!!!
हुस्न की चौखट पर क्यो ताकता है
वह तो मिराज़ की रेत तपती है
तू हसिनाओ के आगे नतमस्तक है
वो तुझपर पीछे से फब्तिया कसती है
इश्क का अगर इतना ही छाया सुरूर है
तो दिखा जलवा कुछ ऐसा तराने में
हसिनाये ख़ुद आकर कहेंगी
शायर, तेरी भी हस्ती है जमाने में!!!!!
रात का इंतज़ार.....
न मुक्कमल पाने की ख्वाहिश है
न बेहिसाब अय्याशी की फरमाईश है
होश की फिजा से घुटन होती है
शाम होते ही प्याले गटकता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ
धूप में जिंदगी के संघर्ष की तपन है
छाँव दूर खड़ी है अपने में मग्न है
दिन में देखो जिन्दगी पहेली है
रात होती है तो जिंदगी को समझता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ
दिन में परछाई की वफ़ा सबको मिलती नही
दिल नही लगा हमसे तो परछाई की गलती नही
रात में तो हर प्रेमी रोता है
कहता है अंधेरे में परछाई को तरसता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ.......
न बेहिसाब अय्याशी की फरमाईश है
होश की फिजा से घुटन होती है
शाम होते ही प्याले गटकता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ
धूप में जिंदगी के संघर्ष की तपन है
छाँव दूर खड़ी है अपने में मग्न है
दिन में देखो जिन्दगी पहेली है
रात होती है तो जिंदगी को समझता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ
दिन में परछाई की वफ़ा सबको मिलती नही
दिल नही लगा हमसे तो परछाई की गलती नही
रात में तो हर प्रेमी रोता है
कहता है अंधेरे में परछाई को तरसता हूँ
चाँद की राह तकता हूँ
मैं रात का इंतज़ार करता हूँ.......
कविता...
एक प्रवाह है वो,एक विचारमाला है
क्रान्ति का अलाव है,प्रेम की मधुशाला है
सभ्यता के दरिया से जो जुड़ती है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
नभ को नापा है इसने,सागर सुखाया है
धर्म को झुठलाया इसने सिर्फ़ प्रेम अपनाया है
विराम इसकी परिभाषा नही,इसमे डूबा संसार सारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
कवि की जीविका,नारी की उन्मुक्तता है
तनहा व्यक्ति के वक्त का फलसफा है
ये तो हर प्रेमी के जीने का सहारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!!
आन्दोलन को आन्दोलन ये बना जाए
श्रृंगार रस की अधिकता वीररस में बदल जाए
समाज का सच्चा आइना ही इसका पिटारा हो
तभी कविता साहित्य की सच्ची सरिताधारा हो!!!!!!
क्रान्ति का अलाव है,प्रेम की मधुशाला है
सभ्यता के दरिया से जो जुड़ती है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
नभ को नापा है इसने,सागर सुखाया है
धर्म को झुठलाया इसने सिर्फ़ प्रेम अपनाया है
विराम इसकी परिभाषा नही,इसमे डूबा संसार सारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
कवि की जीविका,नारी की उन्मुक्तता है
तनहा व्यक्ति के वक्त का फलसफा है
ये तो हर प्रेमी के जीने का सहारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!!
आन्दोलन को आन्दोलन ये बना जाए
श्रृंगार रस की अधिकता वीररस में बदल जाए
समाज का सच्चा आइना ही इसका पिटारा हो
तभी कविता साहित्य की सच्ची सरिताधारा हो!!!!!!
दारू!!!
ग़लतफहमी नही है मेरी
ये सरे गम भुलाती है
महफिल मैं हो अगर अजनबी
तो उनको यार ये बनाती है
हुस्न को देती है ये तारीफ
उनसे ताने ये लाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!
होश मैं रहते है
तो आँखें ख्वाब दिखाती है
शराफत से जीते है
तो जिन्दगी झूठ बुलवाती है
हमे तो नाज़ है इसकी नेक्परस्ती पर
सच को होठो पर तो दारू ही लाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!!
हमे जब वो दिखती है
तो यादें सितम ढाती है
वो हमारे है नही
ये जानकर मोहब्बत भी मुस्कुराती है
इश्क में रोना छोड़ दिया हमने
उनके नाम के आंसू तो दारू बहाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!
मिलते तो यार रोज़ है
रंग तो महफिले जमाती है
बातों मैं खुमार दिखता है
महफिल की शान बढाती है
दगाबाज़ तो हम भी है और यार भी
सच्ची यारी तो दारू निभाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!!!!!
ये सरे गम भुलाती है
महफिल मैं हो अगर अजनबी
तो उनको यार ये बनाती है
हुस्न को देती है ये तारीफ
उनसे ताने ये लाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!
होश मैं रहते है
तो आँखें ख्वाब दिखाती है
शराफत से जीते है
तो जिन्दगी झूठ बुलवाती है
हमे तो नाज़ है इसकी नेक्परस्ती पर
सच को होठो पर तो दारू ही लाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!!
हमे जब वो दिखती है
तो यादें सितम ढाती है
वो हमारे है नही
ये जानकर मोहब्बत भी मुस्कुराती है
इश्क में रोना छोड़ दिया हमने
उनके नाम के आंसू तो दारू बहाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!
मिलते तो यार रोज़ है
रंग तो महफिले जमाती है
बातों मैं खुमार दिखता है
महफिल की शान बढाती है
दगाबाज़ तो हम भी है और यार भी
सच्ची यारी तो दारू निभाती है
दुनिया कहती है पत्थर
इंसान तो हमे दारू बनाती है!!!!!!!!
ख्वाब तारे है मेरे.......
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वह तक जाना है
जो रुकना पड़े अगर बीच मैं
तो अब्र से अपनी प्यास बुझाना है!!!
रात की चांदनी मैं नही
मुझे धुप मैं तपकर जाना है
लोहा नही हूँ जो पिघलू
मुझे तो ख़ुद से सोना बनाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वह तक जाना है!!!!
धरती दिखती नही है वह से
लोगो ने अब तक ये माना है
धरती को वहा से देखना है
मुझे लोगो को झुटलाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वहा तक जन है!!!!!!!
पंखो से वह तक जाना है
जो रुकना पड़े अगर बीच मैं
तो अब्र से अपनी प्यास बुझाना है!!!
रात की चांदनी मैं नही
मुझे धुप मैं तपकर जाना है
लोहा नही हूँ जो पिघलू
मुझे तो ख़ुद से सोना बनाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वह तक जाना है!!!!
धरती दिखती नही है वह से
लोगो ने अब तक ये माना है
धरती को वहा से देखना है
मुझे लोगो को झुटलाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वहा तक जन है!!!!!!!
शायरी!!
परवाने को शमा को एक नजराना और देना है,
कतरा कतरा खून को आखिरी बूँद तक बहना है,
बुझा कैसे दे इस सुलगते अंदाज़ को,
अभी जिन्दगी का आखिरी कश लेना है!!!!
महखाने से बड़ी जिन्दगी है
पैमाना भर मोहब्बत नही है
तन्हाई को पीकर दुबे जा रहे है
हमे बचा ले इतनी किसी को फुर्सत नही है!!!!
हमारे इश्क का कुछ मत पूछो
वो तो उस हुस्न की अमानत है
हम इंतज़ार करेंगे उनका क़यामत तक
बस येही हमारी इश्क में शहादत है
लबो से अपने कुछ कह पाते
नही हुई हमसे वो जुर्रत है
नजरो से ही करते रहे
कहता जमाना जिसे मोहब्बत है!!!!
जो गिरे अगर आंसू तो प्यास तेरी है
कश्ती अगर टूटे तो मेरे साहिल में देरी है
तू दिखा कायनात को अपनी खुदाई
खून बहेगा आंसू नही इतनी औकात मेरी है!!!!!
कतरा कतरा खून को आखिरी बूँद तक बहना है,
बुझा कैसे दे इस सुलगते अंदाज़ को,
अभी जिन्दगी का आखिरी कश लेना है!!!!
महखाने से बड़ी जिन्दगी है
पैमाना भर मोहब्बत नही है
तन्हाई को पीकर दुबे जा रहे है
हमे बचा ले इतनी किसी को फुर्सत नही है!!!!
हमारे इश्क का कुछ मत पूछो
वो तो उस हुस्न की अमानत है
हम इंतज़ार करेंगे उनका क़यामत तक
बस येही हमारी इश्क में शहादत है
लबो से अपने कुछ कह पाते
नही हुई हमसे वो जुर्रत है
नजरो से ही करते रहे
कहता जमाना जिसे मोहब्बत है!!!!
जो गिरे अगर आंसू तो प्यास तेरी है
कश्ती अगर टूटे तो मेरे साहिल में देरी है
तू दिखा कायनात को अपनी खुदाई
खून बहेगा आंसू नही इतनी औकात मेरी है!!!!!
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