ख्वाब तारे है मेरे.......

ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वह तक जाना है
जो रुकना पड़े अगर बीच मैं
तो अब्र से अपनी प्यास बुझाना है!!!

रात की चांदनी मैं नही
मुझे धुप मैं तपकर जाना है
लोहा नही हूँ जो पिघलू
मुझे तो ख़ुद से सोना बनाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वह तक जाना है!!!!

धरती दिखती नही है वह से
लोगो ने अब तक ये माना है
धरती को वहा से देखना है
मुझे लोगो को झुटलाना है
ख्वाब तारे है मेरे
पंखो से वहा तक जन है!!!!!!!

1 comment:

  1. "लोहा नही हूँ जो पिघलू
    मुझे तो ख़ुद से सोना बनाना है"

    excellent lines again..!!

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