गुलामी की चादर फ़िर ओढ़ लो
आज़ादी तुमको ज़चीही नही
अमेरिकन चश्मे से तरक्की मत नापो
देसी आखो से देखो हालत है बिगड़ी हुई
जो ज्यादा मिठास घुली है आज़ादी में
बना लो नमक,दांडी की पगडण्डी अभी भी वही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!
पहले जो नेता कहलाते थे
वो आन्दोलन करते थे राजनीति नही
सत्ता के प्यासे गिद्ध जो उड़ रहे है
वो सब चूस लेंगे,बचेगी नही निशानी कोई
जो ये शब्द नही लगते अच्छे तुमको
पूछो आधी आबादी से,जो गर्त में है डूबी कही
चेत जाओ अब तो मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!
संस्कृति के मेले लग रहे वीराने में
संस्कारो की भाषा पड़ी तहखाने में कही
नारी का उत्थान हो रहा यहाँ
लोगो की आखो में लज्जा बची ही नही
धर्म का चोगा सब पहने डोळ रहे है
अब यहाँ भक्त ही भक्त है भगवान् नही
भ्रष्टाचार का किस्सा जो मैं लिखने बैठू
तो कम पड़ जायेंगे हिन्दी के शब्दकोष सभी
चेत जाओ मेरे सारे भारतवासी
कहेगी दुनिया,भारत में क्रांति हुई थी कभी!!!!!!
:-)
ReplyDeleteLIKE EVER
GREAT!!!!!!!!!!
आज मै दावे से कह सकता हुं कि भारत ने आजादी के लिए जो संघर्ष किया वह 1947 के छलावे से ठंडा पड गया। आज भारत के दुश्मन फिर भारत की सत्ता पर बैठे है। देश पर ऐसा विभाजनकारी संविधान लाद दिया गया है कि फिर से क्रांति करना मुश्किल है । केशरीया, लाल और हरे को एक होना होगा फिरंगियो को भगाने के लिए ।
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