एक प्रवाह है वो,एक विचारमाला है
क्रान्ति का अलाव है,प्रेम की मधुशाला है
सभ्यता के दरिया से जो जुड़ती है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
नभ को नापा है इसने,सागर सुखाया है
धर्म को झुठलाया इसने सिर्फ़ प्रेम अपनाया है
विराम इसकी परिभाषा नही,इसमे डूबा संसार सारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!
कवि की जीविका,नारी की उन्मुक्तता है
तनहा व्यक्ति के वक्त का फलसफा है
ये तो हर प्रेमी के जीने का सहारा है
कविता साहित्य की वो सरिताधारा है!!!!
आन्दोलन को आन्दोलन ये बना जाए
श्रृंगार रस की अधिकता वीररस में बदल जाए
समाज का सच्चा आइना ही इसका पिटारा हो
तभी कविता साहित्य की सच्ची सरिताधारा हो!!!!!!
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