जो होना था उसकी फरमाइश थी
जो हुआ उसकी कहाँ ख्वाइश थी
साकी से नफरत करने लगा शायर
भूल गया होश में ही चोट खाई थी!!!!!
खता तुझसे कभी होती नही
फ़िर भी फरियाद तेरी वो सुनती नही
अब तो मोहब्बत कर बैठा शायर
पहले सोचना था जब ये आग लगायी थी!!!!
तुझे उसे कहना बहुत कुछ है
लफ्जों की तुझमे कहाँ कमी है
फ़िर भी खामोश रहता है शायर
सब बेवफा, जिसने साथ दिया तन्हाई थी!!!!
इल्म होता नही उसको बेकरारी का
फिजूल ही लुत्फ़ उठाती है शायरी का
एक इकरार करता है आज शायर
अल्फाज़ की दुनिया उसी के लिए सजाई थी!!!!!!
खता तुझसे कभी होती नही
ReplyDeleteफ़िर भी फरियाद तेरी वो सुनती नही
अब तो मोहब्बत कर बैठा शायर
पहले सोचना था जब ये आग लगायी थी!!!!
बहुत ही अच्छी ग़ज़ल बधाई स्वीकार करें
shukriya abhivyakti!!!!!!
ReplyDeleteखता तुझसे कभी होती नही
ReplyDeleteफ़िर भी फरियाद तेरी वो सुनती नही
अब तो मोहब्बत कर बैठा शायर
पहले सोचना था जब ये आग लगायी थी
जोरदार रचना है आपकी..........लाजवाब लिखा है.लखते रहें
स्वागत है आपका
sunder abhivyakti, blog jagat men swagat hai.
ReplyDeleteखता तुझसे कभी होती नही
ReplyDeleteफ़िर भी फरियाद तेरी वो सुनती नही
अब तो मोहब्बत कर बैठा शायर
पहले सोचना था जब ये आग लगायी थी!!!!
आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
गार्गी
gargi ji,swapn ji,digambar ji,rajput ji aapki tareef k liye bahut bahut shukriya!!!!
ReplyDeleteहुज़ूर आपका भी ....एहतिराम करता चलूं .......
ReplyDeleteइधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ
ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
-(बकौल मूल शायर)
स्वागत है. शुभकामनायें.
ReplyDeletewah jee wah narayan narayan
ReplyDeleteachhi lagi
ReplyDeleteBADHAI
nazm ka kamaal hi kahiye hujur jo aaj aapki mahfil me aaye ...sach me badi umda soch hai aapki
ReplyDeleteबहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ReplyDeletewell done....& welcome to my blog...
ReplyDeletewaah bhai alfazz waah .. shbd nhi mil rhe h taarif ke aapki :)
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