विचार दृढ, स्वभाव शीतल
महत्वकांशी उड़ान की वाहिनी हो
त्वचा कोमल, अदभूत सौंदर्य
खिले कपोल, चंचल मृगनयनी हो
मैं नतमस्तक निस्वार्थ प्रेमी हूँ
मेरी कविता, मेरे गीतों की रागिनी हो!!!
महत्वकांशी उड़ान की वाहिनी हो
त्वचा कोमल, अदभूत सौंदर्य
खिले कपोल, चंचल मृगनयनी हो
मैं नतमस्तक निस्वार्थ प्रेमी हूँ
मेरी कविता, मेरे गीतों की रागिनी हो!!!
संस्कारी गुण, स्वतंत्र आचार
विषमता में भी धीर धारिणी हो
प्रेरणादायी जीवन, तुम उच्च शिक्षित
कर्मठता की सारिणी हो
मैं नतमस्तक निस्वार्थ प्रेमी हूँ
मेरी कविता, मेरे गीतों की रागिनी हो!!!!१
नव वस्त्र शौकीन, नृत्य चेतनात्मक
मुस्कुराती तुम पवित्र क्रोधाग्नि हो
परस्पर सहयोग, भावनात्मक हृदय
प्रेम विमुख, मेरे दुखो की तारिणी हो
मैं नतमस्तक निस्वार्थ प्रेमी हूँ
मेरी कविता,मेरे गीतों की रागिनी हो!!!!
wah bhai abhishek, hindi ke shabdon ka itna achcha prayog premika ke gunon ko ujagar karti prashansniya kavita. badhai
ReplyDeletemain natmastak.................. vahini ho. wah.
This comment has been removed by the author.
ReplyDeletedhanyawaad swapn ji!!!!!!
ReplyDeletebahut sundar.............
ReplyDelete---------------
kripya ise bhi DEKHEN.
http://shabdkar.blogspot.com
Bhai...
ReplyDeletemein to sirf itna hi kahunga ki is kavita ko padhte hue maine jo kalpana kari.. aisa mere saath kabhi kabhi hi hota hai...
Adbhut...
Way to Go