अरनवी का इस्तकबाल करता हूँ
मुझे चूमती सूरज की लालिमा है
दाना पानी खुदा की नेमत
फ़िर भी निकल पड़ता मेरा कारवां है
पतंग नही डोर से लिपट उडू
मेरी तम्मना उड़ान,रखना निचे जहान है
चाहे पंछी हूँ या ख्वाब हूँ
आसमान ही मेरा आशियाँ है!!!!
हवा का रुख चाहे विरूद्ध हो
पंखो को नही समेटना है
मुझे अपनी डाली का पता याद है
सांझ पड़े वही वापस लौटना है
धरती पर सबके ठिकाने है
यहाँ तो मैं हूँ,मेरा पूरा आसमा है
चाहे पंछी हूँ या ख्वाब हूँ
आसमान ही मेरा आशियाँ है!!!!!!
tht's good yr....
ReplyDeletespecially first 2 lines...