आखर आखर में तो प्रजा जानती
अन्न दुग्ध में ये नाम छानती
गीली चिंगारी से सुलगती
बस ये गीले नैन मांगती
सत्तावन में थी घटी क्रान्ति
हमने तो सिर्फ सुनी क्रान्ति!!!
15 अगस्त की मुंडेर फांदती
हर दिवस पे बस छुट्टी मांगती
ढाई आखर की ये भी प्रेम भी
१४ फ़रवरी को अब रंगती क्रान्ति
हमने तो सिर्फ सुनी क्रान्ति!!!
चीनी की महंगी मिठास बाँटती
विधायक की सारी विधि गाँठती
जनता जनार्दन बस ताली पीट रही
गेंद बल्ले से पिटी क्रान्ति
हमने तो सिर्फ सुनी क्रान्ति!!!
चुल्लू भर पानी में ताकती
राम रहीम दलित में झांकती
'बदलाव की जननी' चीत्कार भर रही
फूलें नथुनों में बस बंधी क्रान्ति
हमने तो सिर्फ सुनी क्रान्ति!!!
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