न शराफत है न बेमुरौवत है
न हजरत है हम ज़माने में
न बेवफा है न किसी से खफा है
न मेहमान है हम हर शामियाने में
रंगीन फिर भी मन की हर शाम है
दिल ढूंढता है सुकून भीतर महखाने में !!!!
बदनाम इंसान है बदनाम मोहल्ला है
इतने कसूर है इस पैमाने में
हुस्न के सच्चे कद्रदान है फिर भी
हुस्न को मिलते सभी खोट दीवाने में
आशिक मिजाज अंदाज़ नहीं बदलता मन का
दिल निभाता है मोहब्बत भीतर महखाने में !!!!
न समझे किस्मत न बदले किस्मत
बस मशगूल घूम रहे अनजाने में
शोहरत की चाह दबी मन में
वरना कौन पूछेगा कब्र के वीराने में
सिकंदर फिर भी जिन्दा है जहन में
दिल पहनता है ताज भीतर महखाने में !!!!!!
न हजरत है हम ज़माने में
न बेवफा है न किसी से खफा है
न मेहमान है हम हर शामियाने में
रंगीन फिर भी मन की हर शाम है
दिल ढूंढता है सुकून भीतर महखाने में !!!!
बदनाम इंसान है बदनाम मोहल्ला है
इतने कसूर है इस पैमाने में
हुस्न के सच्चे कद्रदान है फिर भी
हुस्न को मिलते सभी खोट दीवाने में
आशिक मिजाज अंदाज़ नहीं बदलता मन का
दिल निभाता है मोहब्बत भीतर महखाने में !!!!
न समझे किस्मत न बदले किस्मत
बस मशगूल घूम रहे अनजाने में
शोहरत की चाह दबी मन में
वरना कौन पूछेगा कब्र के वीराने में
सिकंदर फिर भी जिन्दा है जहन में
दिल पहनता है ताज भीतर महखाने में !!!!!!